विश्व पर्यावरण दिवस' क्या हर साल इसी तरह मनाया जाएगा ?
आखिरकार अंधाधुन वृक्षों की कटाई को कैसे रोकेगी सरकार या आंकड़ों में ही पौधारोपण होगा ?
भीलवाड़ा :
विश्व पर्यावरण दिवस हर वर्ष 5 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत United Nations द्वारा वर्ष 1972 में पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से की गई थी। यह दिन हमें प्रकृति और पर्यावरण के महत्व को समझने तथा उसके संरक्षण का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। हर वर्ष सरकार द्वारा पौधा रोपण के लिए लाखों करोड़ों का बजट दिया जाता है परंतु प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं होने की वजह से यह केवल कागजों में ही सीमित रह जाता है और लगातार पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के चलते प्रदूषण बढ़ रहा है इसलिए इस महायज्ञ में कहीं ना कहीं सरकार के साथ संबंधित विभाग और अधिकारियों की भी महत्वपूर्ण आवश्यकता मानी जाती है परंतु अफसर जब तक अपने 'A C रूम' से बाहर निकाल कर धरातल पर इसका आकलन नहीं करेंगे, तो यह विश्व पर्यावरण दिवस मनाना मात्र एक खानापूर्ति होगा ?
पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है। शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, उपजाऊ भूमि, वन, नदियाँ और जैव विविधता मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। लेकिन बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण, वनों की कटाई, प्लास्टिक प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँच रहा है। इसका परिणाम जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ और विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है।
विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और उन्हें प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाना है। इस अवसर पर वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, पर्यावरण रैलियाँ, संगोष्ठियाँ तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित गतिविधियाँ आयोजित कर लोगों को प्रेरित किया जाता है।
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, प्लास्टिक का उपयोग कम करना चाहिए, जल और बिजली की बचत करनी चाहिए तथा स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए। छोटे-छोटे प्रयास भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
अंततः, विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि यदि हम पृथ्वी और पर्यावरण की रक्षा करेंगे, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा। इसलिए हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना चाहिए।
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