आज़ादी के 79 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित मालखेड़ा

Jul 1, 2026 - 09:44
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आज़ादी के 79 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित मालखेड़ा

श्मशान तक रास्ता नहीं।

शाहपुरा। एक ओर देश विकसित भारत और अमृतकाल की ओर अग्रसर होने का दावा कर रहा है, वहीं भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा तहसील अंतर्गत डाबला चांदा ग्राम पंचायत के मालखेड़ा गांव के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। लगभग 700 मतदाताओं वाले इस गांव में स्थिति इतनी गंभीर है कि ग्रामीणों को अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए कोई पक्का एवं सुगम मार्ग उपलब्ध नहीं है। अतिक्रमण के कारण रास्ता संकरा हो चुका है तथा अधिकांश हिस्सा कच्चा होने से बरसात के दिनों में कीचड़ और जलभराव से पूरी तरह दुर्गम बन जाता है। कई स्थानों पर एक फीट तक कीचड़ जमा होने से शव यात्रा निकालना भी मुश्किल हो जाता है।

बारिश में अधूरी रह जाती हैं अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएं

ग्रामीणों ने बताया कि श्मशान घाट पर किसी प्रकार का टीन शेड या स्थायी छायादार व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के दौरान अंतिम संस्कार में गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कई बार अचानक बारिश होने से चिताएं पूरी तरह नहीं जल पातीं और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बाधित हो जाती है, जिससे मृतक के परिजनों की भावनाएं आहत होती हैं।

खेतों के बीच से गुजरती है अंतिम यात्रा

श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए कई जगह खेतों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। फसल खड़ी होने की स्थिति में ट्रैक्टर अथवा अन्य वाहन ले जाना और भी कठिन हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले यह क्षेत्र चारागाह भूमि था, लेकिन अतिक्रमण के चलते खेतों में तब्दील हो गया है, जिससे अंतिम यात्रा निकालने में कई बार विवाद और असुविधा की स्थिति भी पैदा होती है।

बबूल की झाड़ियां और कांटों से भरा रास्ता

ग्रामीणों ने बताया कि रास्ते में जगह-जगह बबूल की झाड़ियां और कांटे फैले हुए हैं। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए पैदल चलना भी चुनौती बना हुआ है। अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

पेयजल संकट भी बना बड़ी समस्या

गांव में चंबल जल परियोजना की पाइपलाइन पहुंचने के बावजूद नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कभी चार दिन तो कभी एक सप्ताह बाद पानी की सप्लाई होती है। ऐसे में लोगों को पीने के पानी के लिए करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित रेहड़ गांव से पानी लाना पड़ता है।

कई बार की शिकायतें, फिर भी समाधान नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट तक सड़क निर्माण, अतिक्रमण हटाने, टीन शेड निर्माण और पेयजल समस्या के समाधान को लेकर कई बार प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही श्मशान घाट तक पक्का रास्ता, शेड निर्माण और नियमित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई तो वे धरना-प्रदर्शन एवं जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि जब देश चांद और डिजिटल युग की उपलब्धियों की बात कर रहा है, तब मालखेड़ा के लोग आज भी सम्मानजनक अंतिम संस्कार और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष क्यों कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देता है और ग्रामीणों को उनकी आवश्यक सु

विधाएं कब उपलब्ध हो पाती हैं।

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