38 सीएलएफ कलस्टरों के भवन निर्माण के लिए ₹3.80 करोड़ की घोषणा, प्रत्येक सीएलएफ को मिलेंगे 10 लाख रुपये: भूपेंद्र यादव

सीएलएफ संगोष्ठी में केंद्रीय मंत्री ने कहा- राजीविका उत्पादों की मार्केटिंग एवं बेहतर मंच उपलब्ध कराने पर रहेगा विशेष फोकस

Jun 11, 2026 - 21:52
Jun 12, 2026 - 14:44
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38 सीएलएफ कलस्टरों के भवन निर्माण के लिए ₹3.80 करोड़ की घोषणा, प्रत्येक सीएलएफ को मिलेंगे 10 लाख रुपये: भूपेंद्र यादव
38 सीएलएफ कलस्टरों के भवन निर्माण के लिए ₹3.80 करोड़ की घोषणा, प्रत्येक सीएलएफ को मिलेंगे 10 लाख रुपये: भूपेंद्र यादव

कोटपूतली।राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के अंतर्गत कार्यरत संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) की संगोष्ठी का आयोजन गुरुवार को आरपीएस स्कूल बहरोड़ में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राजीविका से जुड़ी महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों एवं अधिकारियों ने सहभागिता की।कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राजस्थान सरकार श्री संजय शर्मा, राजीविका मिशन निदेशक प्रियंका गोस्वामी, जिला कलेक्टर कोटपूतली-बहरोड़ अपर्णा गुप्ता, जिला कलेक्टर अलवर आर्तिका शुक्ला, जिला कलेक्टर खैरथल-तिजारा अतुल प्रकाश सहित राजीविका से जुड़ी महिलाएं एवं अधिकारी उपस्थित रहे।केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन के उद्देश्य से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि क्षेत्र के 38 संकुल स्तरीय संगठनों (सीएलएफ) के भवन निर्माण का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। इन भवनों में आधुनिक संसाधनों एवं आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए सांसद कोष से प्रत्येक सीएलएफ को 10-10 लाख रुपये उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसके लिए कुल ₹3.80 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।उन्होंने कहा कि ये भवन केवल ईंट-पत्थर की संरचनाएं नहीं होंगे, बल्कि महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक विकास के नए केंद्र बनेंगे। इनके माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, बैठकों, उत्पाद प्रदर्शन और विपणन गतिविधियों के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध होगा, जिससे उनकी आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। यह पहल महिलाओं की आय बढ़ाने, उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुझे विश्वास है कि ये भवन हजारों बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हुए उन्हें विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगे।उन्होंने कहा कि राजीविका उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध करवाने, उनकी मार्केटिंग को बढ़ावा देने तथा महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को उपयुक्त मंच उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे। ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। राजीविका के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, बैंक ऋण एवं रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं और परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही हैं। राजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक भागीदारी को बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।राजीविका मिशन निदेशक प्रियंका गोस्वामी ने मिशन की उपलब्धियों, महिला समूहों एवं वित्तीय सहायता योजनाओं की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि राजीविका मिशन निदेशक प्रियंका गोस्वामी ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 41 जिलों में राजीविका का विस्तार है। मिशन के अंतर्गत 368 ब्लॉक, 11 हजार 356 ग्राम पंचायतों एवं 38 हजार 703 गांवों में ग्रामीण महिलाओं तक पहुंच बनाई गई है। प्रदेश में 4.37 लाख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 51.49 लाख परिवार जुड़े हुए हैं।उन्होंने बताया कि मिशन के अंतर्गत अब तक परियोजनाओं के माध्यम से 2158 करोड़ रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करवाई गई है, जबकि बैंक ऋण के रूप में 11 हजार 846.84 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता समूहों को प्रदान की गई है। राजस्थान महिला निधि के माध्यम से भी महिला समूहों को 887.86 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध करवाया गया है।उपलब्धियों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि अलवर जिले में 8965 स्वयं सहायता समूहों से 99 हजार 528 परिवार जुड़े हैं। जिले में 845 ग्राम संगठन एवं 26 संकुल स्तरीय संगठन कार्यरत हैं। वहीं कोटपूतली-बहरोड़ जिले में 5379 स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 57 हजार 865 परिवारों को जोड़ा गया है। जिले में 403 ग्राम संगठन एवं 15 संकुल स्तरीय संगठन सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। वहीं खैरथल- तिजारा जिले में 3763 स्वयं सहायता समूहों से 38 हजार 663 परिवार जुड़े हैं। जिले में 35 ग्राम संगठन एवं 13 संकुल स्तरीय संगठन कार्यरत हैं। राजीविका मिशन निदेशक ने बताया कि महिला समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए बैंक ऋण, आजीविका संवर्धन सहायता एवं प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। कोटपूतली-बहरोड़ जिले में स्वयं सहायता समूहों को बैंक ऋण के रूप में 161.96 करोड़ रुपये, परियोजना सहायता के रूप में 22.89 करोड़ रुपये तथा राजस्थान महिला निधि के माध्यम से 9.20 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध करवाई गई है।उन्होंने बताया कि राजीविका के माध्यम से महिलाओं को नियमित बचत, आंतरिक ऋण व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, कौशल विकास एवं उद्यमिता के क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाएं विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।उन्होंने बताया कि संकुल स्तरीय संगठनों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए कार्यशाला भवन, कार्यालय एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिलों में संकुल स्तरीय संगठनों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाने हेतु कार्यवाही की जा रही है।इस दौरान सभी जिला कलेक्टर ने अपने अपने क्षेत्र में राजीविका एवं स्वयं सहायता समूह व सीएलएफ के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी देते हुए भविष्य की कार्ययोजना बतायी।

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