"रक्त की भारी कमी के बीच रक्तमित्र समूह बना संजीवनी:
एक दिन में तीन जिंदगियां बचाई,ब्लडबैंक में बिना डोनर नहीं मिल रहा खून"
भीलवाड़ा-
भीलवाड़ा महात्मा गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी के बीच रक्तमित्र समूह एक बार फिर मरीजों के लिए संजीवनी बनकर उभरा है। बिना डोनर के ब्लड मिलना मुश्किल हो रहा है, ऐसे संकट के समय में समूह के रक्तवीरों ने एक ही दिन में तीन गंभीर मरीजों की जान बचाकर शहर में मिसाल कायम की है।
संकट के बीच सेवा:
ब्लड बैंक अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में A+, B+, O+ सहित कई ग्रुप का स्टॉक लगभग खत्म है। इमरजेंसी केस में भी बिना रिप्लेसमेंट डोनर के ब्लड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे हालात में रक्तमित्र समूह की तत्परता से तीन परिवारों के चिराग बुझने से बच गए।
केस 1: प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को B+ ब्लड की अर्जेंट जरूरत थी। आबिद खान तुरंत पहुंचे और रक्तदान कर जच्चा-बच्चा दोनों की जान बचाई।
केस 2: 7 वर्षीय मोहम्मद हमजा को गंभीर एनीमिया था। शाहरुख अब्बासी ने समय पर पहुंचकर रक्तदान किया और मासूम को नया जीवन दिया।
केस 3:रूबी देवी वर्मा को ऑपरेशन के दौरान ब्लड चाहिए था। आबिद खान ने रूबी देवी वर्मा के लिए भी रक्तदान कर दूसरी जिंदगी बचाई।
टीम का जज्बा:
मैसेज देखकर मोहम्मद खलील भाई भी दौड़े आए, लेकिन 2 माह पूर्व डोनेट करने के कारण नियमानुसार रक्तदान नहीं कर सके। वसीम खान और मोईनुद्दीन खान ने अस्पताल में रहकर रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाया।
ब्लड बैंक प्रभारी ने कहा, "रक्त की कमी से हम जूझ रहे हैं। बिना डोनर के ब्लड देना संभव नहीं है। रक्तमित्र समूह जैसे संगठनों के कारण ही हम इमरजेंसी संभाल पा रहे हैं। आबिद और शाहरुख जैसे डोनर आज की जरूरत हैं।"
रक्तमित्र समूह ने
अपील की, "ब्लड बैंक खाली पड़े हैं। एक-एक यूनिट की कीमत है। 18 से 60 साल का हर स्वस्थ व्यक्ति आगे आए। आपका 10 मिनट का समय किसी की पूरी जिंदगी बचा सकता है।
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