सोने री चमकती रे, धरा राजस्थान री अखिल भारतीय साहित्य परिषद की मासिक काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन
शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।
शाहपुरा-अखिल भारतीय साहित्य परिषद की मासिक काव्य गोष्ठी केशव प्रन्यास भवन गांधीपुरी में आयोजित हुई।
गोष्ठी में मुख्य अतिथि प्रज्ञा प्रवाह के राजस्थान क्षेत्र सहसंयोजक डॉ सत्यनारायण कुमावत थे। अध्यक्षता परिषद अध्यक्ष तेजपाल उपाध्याय ने की। विशिष्ट अतिथि बालकृष्ण बीरा रहे।
काव्य गोष्ठी का प्रारंभ 'तू शब्द सजा दे मां, मैं गीत सुनाता हूं। टूटे हुए शब्दों से, मैं स्वर को सजाता हूं। रचना के माध्यम से डॉक्टर परमेश्वर कुमावत "परम" ने की । गोष्ठी में जयदेव जोशी ने 'रंग रंग के फुलां जेहड़ा शब्दां रो गलहार'। सोमेश्वर व्यास ने 'त्याग प्रेम सौंदर्य शौर्य की, इसके कण-कण की गाथाएं' सुनाकर राजस्थान की धरती के सौंदर्य का वर्णन किया। प्रसिद्ध राष्ट्रीय गीतकार बालकृष्ण वीरा ने 'रणबंका रण बांकुरा की धरती राजस्थान।', डॉक्टर कमलेश पाराशर में 'राम की भक्ति तुम मन से करो, सभी काज सहज ही कर पाओगे।' दीपक पारीक ने 'तलवार की चमक में शौर्य झलकता है।' डॉ सत्यनारायण कुमावत ने कसो लंगोटो ले ल्यो सोटो, हमें अयोध्या जाणों है।' सी ए अशोक बोहरा ने 'जहां सूरज भी तपकर निखरता है वो धारा हूं मैं।' डॉक्टर परमेश्वर कुमावत 'परम' ने 'सोने री चमकती रे धरा राजस्थान री। अठै वीरां रो इतिहास जगती जाणती।' सुनाकर राजस्थान की धरती के अदम्य साहस, शौर्य, त्याग, तपस्या और बलिदान का वर्णन किया। ओम माली 'अंगारा' ने भाषा बिन यूं तड़पत राजस्थान, पानी बिन ज्यूं प्यासे हैं प्राण।' तेजपाल उपाध्याय ने 'मेरे पथ कब आओगे राम। बाट जोहत उमरिया बीती रटती रहती हूं नाम।' कैलाश सिंह जाड़ावत ने 'गोरा धोरा मखमल सोना जेड़ी रेत अठै।' आशुतोष सिंह सोदा ने राममयी हर वेश, देश राममयी है । हर मन में उत्साह प्रभाती उदित नई है।' सुन कर गोष्ठी का वातावरण राममयी कर दिया।
आनंद मठ अमर उपन्यास - कुमावत काव्य गोष्ठी में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर 'आनंद मठ' उपन्यास पर चर्चा की गई। गोष्ठी में डॉक्टर सत्यनारायण कुमावत ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन में आनंदमठ की प्रेरणा आनन्द मठ की विषय वस्तु पर विशेष प्रकाश डाला गया। कुमावत ने कहा कि आनंद मठ एक ऐसा अमर उपन्यास है जिसने लाखों क्रांतिकारियों को प्रेरणा दी। वंदे मातरम् जैसे पंचाक्षरी मंत्र ने देश की आजादी में बिल्कुल फूंक दिया। आनंद मठ की प्रासंगिकता आज भी उतनी है जितनी 19वीं शताब्दी में। आज देश के प्रत्येक युवा को आनंद मठ उपन्यास को एक बार जरूर पढ़ना चाहिए। आनंद मठ उन सन्यासियों की कहानी है जिन्होंने इस देश की रक्षा के लिए सर्वस्व समर्पित कर दिया। आनंद मठ में लिखा गया वंदे मातरम् गीत आज राष्ट्रीय गीत के रूप में पूरे विश्व में भारतीय श्रद्धा और विश्वास के साथ गाते हैं।
What's Your Reaction?







