“इलाज का वादा मिला, सहारा नहीं” – पैरालिसिस से जूझते विष्णु की दर्दनाक कहानी
विधायक पितलिया के वादे का इंतजार
भीलवाड़ा। जिले की रायपुर तहसील के मोखुंदा क्षेत्र के छोटे से राजस्व ग्राम मानसिंहपुरा में एक ऐसा घर है, जहां हर दिन उम्मीद और बेबसी के बीच गुजर रहा है। इस घर का केंद्र है मासूम विष्णु गुर्जर, जिसकी जिंदगी पांच साल पहले आई एक गंभीर बीमारी ने पूरी तरह बदल दी।
पैरालिसिस की मार ने उसके शरीर के निचले हिस्से को जकड़ लिया और जो बच्चा कभी खेलता-कूदता था, आज दूसरों के सहारे जीने को मजबूर है। परिवार का गुजारा खेती पर निर्भर है। सीमित साधनों के बावजूद पिता ने बेटे के इलाज के लिए हर संभव प्रयास किए, लेकिन आर्थिक तंगी और हालात लगातार बाधा बनते गए। पिता की आंखों में दर्द साफ झलकता है, जब वे कहते हैं कि विष्णु ही उनका बुढ़ापे का एकमात्र सहारा है।
करीब दो साल पहले एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान सहाड़ा विधायक लादू लाल पितलिया से परिवार ने मदद की गुहार लगाई थी। उस समय विधायक ने विष्णु के इलाज की जिम्मेदारी लेने का भरोसा दिलाया, जिससे परिवार को एक नई उम्मीद मिली थी। लेकिन समय बीतने के साथ वह उम्मीद अधूरी नजर आने लगी। आज भी विष्णु की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।
वह कक्षा 8 का छात्र है, लेकिन अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता। डॉक्टरों के अनुसार उसकी आंखें, मस्तिष्क और बोलने की क्षमता सामान्य होने के कारण दिव्यांगता 40 प्रतिशत से अधिक नहीं मानी जा सकती, लेकिन उसकी वास्तविक स्थिति इससे कहीं अधिक कठिन है।विष्णु का बचपन, उसके सपने और उसकी स्वतंत्रता जैसे थम से गए हैं।
मीडिया प्रभारी मोहम्मद अशरफ रंगरेज, मोखुंदा के अनुसार अब परिवार और ग्रामीणों की नजरें विधायक के उस वादे पर टिकी हैं, जो कभी उम्मीद की किरण बना था। आज विष्णु को कागजी प्रक्रिया से ज्यादा एक सच्चे सहारे और समय पर इलाज की जरूरत है, क्योंकि वही उसके जीवन की सबसे बड़ी उम्मीद बन चुकी है।
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