मोखुंदा: बदहालियों से घिरा ‘आदर्श पंचायत’ का ताज!*

Nov 30, 2025 - 11:18
 0  84
मोखुंदा: बदहालियों से घिरा ‘आदर्श पंचायत’ का ताज!*

बस स्टैंड से लेकर नालियों तक… हर ओर अव्यवस्था, ग्रामीण परेशान

—प्रशासन बेपरवाह

गोपाल मेघवंशी

 रायपुर उपखंड की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत मोखुंदा, जिसे वर्षों तक “आदर्श पंचायत” के रूप में पहचाना जाता रहा, आज समस्याओं का ऐसा अड्डा बन चुकी है जहाँ विकास नाम की चीज़ सिर्फ फाइलों में दिखाई देती है।

ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी पंचायत प्रशासन की चुप्पी अब गुस्से में बदल रही है।

बस स्टैंड: गंदगी का ढेर, यात्रियों को न सुविधा न सुरक्षा मोखुंदा बस स्टैंड से प्रतिदिन 30 से अधिक बसों का आवागमन होता है।

गंगापुर, फतेहनगर, कुँवारिया, आमेट, देवगढ़, मारवाड़ सहित कई मार्गों की बसें यहां से गुजरती हैं।

 लेकिन इतनी भीड़ और आवाजाही के बावजूद सार्वजनिक शौचालय दुर्दशा की हद पार कर चुका है बाहर तक फैली गंदगी अंदर जाना नामुमकिन महिलाओं के लिए पूरी तरह असुरक्षित पुरुष खुले में उपयोग करने को मजबूर पंचायत की देखरेख में बना यह सुविधा घर आज “शर्म का प्रतीक” बन गया है।

 नालियाँ जाम, सड़क पर बहता गंदा पानी—स्कूली बच्चों की सेहत खतरे में पंचायत में तैनात 2–3 सफाई कर्मियों को मासिक ₹21,000 प्रतिमाह दिया जा रहा है, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके बिलकुल उलट है अधिकतर नालियाँ कचरे और प्लास्टिक से भरी जगह-जगह पानी ठहरा गंदा पानी सड़क पर बहता दिखता है आए दिन मच्छरों का प्रकोप स्कूल आने-जाने वाले बच्चों पर सबसे अधिक असर ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद भी पंचायत पूर्णतः खामोश बनी हुई है।

 5 साल से अतिक्रमण पर ‘कार्रवाई शून्य’ बस स्टैंड चौराहे की कीमती पंचायत भूमि पर अतिक्रमण वर्षों से जस का तस है।

ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें दर्ज करवाईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर शून्य परिणाम।

 अतिक्रमण के कारण यह क्षेत्र अब पूरी तरह अनुपयोगी बन गया है।

 मुख्य प्रवेश द्वार—गंदगी ने दीवार पर कब्जा जमा रखा गंगापुर की ओर से आने वाला मोखुंदा का मुख्य प्रवेश द्वार अब गंदगी से सराबोर है। नालियों की सफाई महीनों से नहीं हुई। यहीं नहीं—आवारा गोवंश, सूअर और कुत्तों का आतंक भी लगातार बढ़ता जा रहा है। व्यापारी और वहां रहने वाले परिवार परेशान हैं।

 सड़क लाइटें ठप, रात में अंधेरा—पंचायत बिजली बिल तक नहीं भर पा रही गाँव के मुख्य मार्ग और सार्वजनिक स्थानों पर लगी स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं।

पंचायत पर बिजली बिल का बकाया बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण अंधेरे में निकलने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का सवाल—विकास का पैसा आखिर जाता कहाँ है? सोशल मीडिया प्रभारी मो. अशरफ रंगरेज सहित ग्रामीणों ने बताया कि मोखुंदा पंचायत में अव्यवस्थाएँ इतनी बढ़ चुकी हैं कि अब आवाज़ उठाना मजबूरी बन गई है।

 लोगों का कहना है “आदर्श पंचायत नाम की थी… पर काम में ‘आदर्श’ कहीं दिखाई नहीं देता।” *मोखुंदा की आवाज अब उठ चुकी है प्रशासन कब जागेगा?*

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow