चलती एंबुलेंस बनी प्रसूति कक्ष, रास्ते में गूंजी नवजात की किलकारी

May 21, 2026 - 18:14
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चलती एंबुलेंस बनी प्रसूति कक्ष, रास्ते में गूंजी नवजात की किलकारी

बनेड़ा।

जीवन और मौत के बीच की दौड़ में एक 108 एंबुलेंस ने न केवल समय से लड़ाई जीती, बल्कि एक नवजीवन को सुरक्षित दुनिया में भी लाया।

 बनेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक गर्भवती महिला को बेहतर उपचार के लिए महात्मा गांधी अस्पताल, भीलवाड़ा रेफर किया गया था। इसके बाद 108 एंबुलेंस के पायलट प्रकाश चंद्र कुमावत गर्भवती महिला और उसके परिजनों को लेकर तत्काल रवाना हुए। रास्ते में अचानक महिला को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।

 स्थिति ऐसी बन गई कि अस्पताल पहुंचने का इंतजार करना संभव नहीं था। ऐसे में एंबुलेंस को बीच रास्ते रोकने के बजाय ईएमटी एहसान अली ने अपनी सूझबूझ और प्रशिक्षण का परिचय देते हुए चलती एंबुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव कराया।

 कुछ ही देर में एंबुलेंस के भीतर नवजात की किलकारी गूंज उठी, जिससे परिजनों के चेहरों पर चिंता की जगह खुशी और राहत दिखाई देने लगी।

ईएमटी एहसान अली ने नवजात की नाल काटकर आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल की, जबकि पायलट प्रकाश चंद्र कुमावत ने पूरी यात्रा के दौरान सहयोग और सतर्कता बनाए रखी।

सुरक्षित प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को स्वस्थ अवस्था में जिला अस्पताल, भीलवाड़ा पहुंचाया गया।

परिजनों ने 108 एंबुलेंस कर्मियों की सराहना करते हुए उन्हें “भगवान का दूसरा रूप” बताया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि आपातकालीन सेवाओं में कार्यरत कर्मियों की तत्परता, अनुभव और मानवता कई बार लोगों के लिए जीवनदायी साबित होती है।

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