भैराणा धाम पर संकट: खनन व औद्योगिक गतिविधियों के विरोध में संत समाज का आंदोलन
दादू पंथ के “हरिद्वार” माने जाने वाले पवित्र स्थल को बचाने की उठी मांग, रीको भूमि आवंटन निरस्त करने की अपील
भीलवाड़ा : राजकुमार गोयल
जयपुर/भीलवाड़ा।भैराणा धाम: अखिल भारतीय श्री दादु सेवक समाज ने भैराणा धाम को विनाश से बचाने हेतु, रीको की भूमि के आवंटन को निरस्त करवाने हेतु उपखंड अधिकारी मांडल को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
अखिल भारतीय श्री दादु सेवक समाज ने एक अत्यंत गंभीर एवं संवेदनशील मुद्दे को उठाते हुए संत शिरोमणि श्री दादूदयाल जी महाराज की पावन समाधि स्थली भैराणा धाम (दादू खोल) पर मंडरा रहे खतरे को लेकर चिंता जताई है।
यह स्थल दादू पंथ का “हरिद्वार” माना जाता है और सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। समाज के अनुसार, यह केवल धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि प्रकृति, वन्य जीवों और पर्यावरण संरक्षण का भी जीवंत उदाहरण है।
करीब 500 वर्ष पूर्व संत दादूदयाल जी ने मानवता, अहिंसा और प्रकृति प्रेम का जो संदेश दिया था, वह आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है। वर्तमान में रीको द्वारा भूमि आवंटन के बाद इस क्षेत्र में खनन और औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने से स्थिति चिंताजनक हो गई है।
इससे भैराणा धाम की भौगोलिक संरचना को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ यहां रहने वाले राष्ट्रीय पक्षी मोर, अन्य वन्य जीव और पर्यावरणीय संतुलन पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए संत समाज और श्रद्धालुओं द्वारा भैराणा धाम को बचाने के लिए शांतिपूर्ण जन आंदोलन शुरू किया गया है।
आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की है कि वस्तुस्थिति का अवलोकन करते हुए रीको द्वारा किया गया भूमि आवंटन तत्काल निरस्त किया जाए, ताकि जनभावनाओं का सम्मान बना रहे और किसी प्रकार का जन आक्रोश उत्पन्न न हो।
संत समाज का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो यह ऐतिहासिक एवं पवित्र धरोहर खतरे में पड़ सकती है।
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